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एआई और रोबोटिक्स ने मशीनों को लेकर इंसानों की समझ को गहरा किया : एक्सपर्ट्स

एआई और रोबोटिक्स ने मशीनों को लेकर इंसानों की समझ को गहरा किया : एक्सपर्ट्स
डालियान चीन: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और रोबोटिक्स इंसानी भावनाओं को समझने और लोगों व मशीनों के बीच बातचीत को मजबूत करने के लिए नई संभावनाएं खोल रहे हैं। यह जानकारी एक्सपर्ट्स की ओर से सोमवार को दी गई।

चीन के डालियान में 23-25 ​​जून तक होने वाली 'एनुअल न्यू चैंपियंस मीटिंग' या 'समर दावोस' से पहले एक्सपर्ट्स ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तेजी से डेटा प्रोसेसिंग से आगे बढ़कर इंसानी व्यवहार, भावनाओं और सामाजिक मेल-जोल को समझने की दिशा में बढ़ रहा है, जिससे हेल्थकेयर, वर्कप्लेस, शिक्षा और रोजमर्रा की जिंदगी में नए-नए इस्तेमाल सामने आ रहे हैं।

 एटोनैटन कंपनी के प्रतिनिधि चेंग जू ने डिजाइनर और रोबोटिक्स रिसर्चर मैडलिन गैनन द्वारा बनाए गए इंटरैक्टिव इंस्टॉलेशन "रोबोट्स एज मिरर्स" के बारे में बताया। यह इंस्टॉलेशन आर्ट, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रोबोटिक्स का एक अनोखा मेल है, जिसमें एक इंडस्ट्रियल रोबोटिक आर्म इंसानों की मौजूदगी और हरकत पर प्रतिक्रिया देती है। 

 उन्होंने आईएएनएस को बताया, "हम इंसान इशारों और हरकतों जैसे बिना बोले दिए जाने वाले संकेतों से एक-दूसरे को समझने में माहिर होते हैं। इस कारण हम इस रोबोट में भी ऐसी ही कुछ खूबियां और एक तरह की पर्सनैलिटी डालने की कोशिश कर रहे हैं। जब आप इसके पास जाकर 'हाय' कहेंगे, तो यह आपकी बात का जवाब देगा। 

लेकिन अगर आप ज्यादा आक्रामक होंगे, तो हो सकता है कि यह भाग भी जाए।" सीईसी के यू सॉन्ग ने "क्लाउड ब्रेन" पेश किया, जो इंसानी भावनाओं और मानसिक स्थिति का विश्लेषण करने के लिए बनाया गया एक एडवांस्ड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम है।

 एआई-आधारित यह प्लेटफॉर्म चहरे के हाव-भाव, आंखों की हरकत, बॉडी लैंग्वेज और व्यवहार के संकेतों का इस्तेमाल करके किसी व्यक्ति की भावनात्मक और मानसिक स्थिति का रियल-टाइम में आकलन करता है। यह सिस्टम पहचान सकता है कि कोई व्यक्ति ध्यान केंद्रित कर रहा है, थका हुआ है, तनाव में है, आराम से है या खुश है, और इस जानकारी को एक डिजिटल डैशबोर्ड पर दिखाता है।

 डेवलपर्स का कहना है कि इस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल हेल्थकेयर, वर्कप्लेस मैनेजमेंट, शिक्षा और मानसिक स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में किया जा सकता है। स्मार्ट हंस की कोऑर्डिनेटर ग्रेटा रामिरेज ने आर्टिस्टिक रिसर्चर मैक्स हारिच द्वारा तैयार किया गया एक इंस्टॉलेशन पेश किया, जो यह पता लगाता है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इंसानी व्यवहार की बारीक बातों को कैसे समझ सकता है।

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