स्वच्छता सर्वेक्षण में बेहतर रैंक प्राप्त करने के लिए नगर निगम ने कई योजनाएं बनाई थीं। लेकिन सभी योजनाएं कागजों पर धरी रह गईं। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लान, वेस्ट डिस्पोजल प्लान, सीवरेज प्रोजेक्ट सहित वेस्ट टू वेल्थ प्लान कागज पर होने के कारण सर्वेक्षण में रांची को कम अंक प्राप्त हुए हैं। रांची की सफाई-व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए निगम पिछले 12 वर्षों से प्रयास कर रहा है। इसके बाद भी सफलता नहीं मिल रही है। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट सर्वेक्षण में शहर की सफाई और वेस्ट डिस्पोजल को प्राथमिकता दी गई है। डोर टू डोर कचरा कलेक्शन के लिए 1600 अंक निर्धारित थे। रांची में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के तहत यह काम निजी एजेंसी से कराना था। लेकिन पिछले 12 साल में 3 कंपनियां काम छोड चुकी हैं। इसके बाद निगम ने खुद डोर टू डोर कचरा उठाने शुरू किया। वाहनों की कमी और सहीं ढंग से मॉनिटरिंग नहीं होने की वजह से शहर के 53 वार्डों के सभी घरों से नियमित रूप से डोर टू डोर कचरा उठाव नहीं हो रहा है। घरों से समय पर कूड़ा उठाव से ही रैंकिंग में सुधार हो सकता है। क्योंकि सर्वेक्षण के दौरान शहर के लोगों से भी फीडबैक लेकर अंक जोड़े जाते हैं।
राष्ट्रीय सागर संवाददाता










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