हरिद्वार। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) रुड़की ने गांवों की अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार देने की दिशा में अहम पहल की है। संस्थान के ग्रामीण प्रौद्योगिकी कार्य समूह ‘रुट-ए जी’ के जरिए विकसित तकनीकों को अब उद्योगों तक पहुंचाया जा रहा है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आत्मनिर्भरता को मजबूती मिलेगी।
आईआईटी रुड़की ने बुधवार को मल्टीमिलेट डिहस्किंग मशीन और हेम्प डिकॉर्टिकेटर जैसी आधुनिक तकनीकों को उद्योग साझेदारों के साथ साझा किया है। ये मशीनें न केवल किसानों और ग्रामीण उद्यमियों के काम को आसान बनाएंगी, बल्कि उत्पादन क्षमता को भी कई गुना बढ़ाने में मदद करेंगी। मिलेट प्रोसेसिंग में समय और मेहनत की बचत होगी, वहीं हेम्प से जुड़े उद्योगों को भी नई गति मिलेगी। इस पहल के तहत इंडो क्लाइमेट लैब, जय मां दुर्गा इंजीनियरिंग कंपनी और धीमान एंटरप्राइजेज जैसे उद्योगों के साथ करार किया गया है, जिससे इन तकनीकों का बड़े स्तर पर उपयोग संभव हो सकेगा।
आईआईटी रुड़की के विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम ग्रामीण भारत में आय बढ़ाने और नए रोजगार के अवसर पैदा करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। संस्थान के निदेशक प्रो. कमल किशोर पंत ने कहा कि आईआईटी रुड़की लगातार ऐसे नवाचारों पर काम कर रहा है, जो सीधे समाज के काम आएं और देश को आत्मनिर्भर बनाने में योगदान दें। कुल मिलाकर, यह पहल गांवों की तस्वीर बदलने के साथ-साथ ‘आत्मनिर्भर भारत’ के सपने को साकार करने की दिशा में एक मजबूत कदम मानी जा रही है।
आईआईटी रुड़की की पहल : ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई रफ्तार
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