कोलकाता। पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री अरूप बिस्वास मंगलवार को पुलिस के सामने पूछताछ के लिए पेश हुए। यह पूछताछ पिछले साल कोलकाता में अर्जेंटीना के फुटबॉलर लियोनेल मेसी के 'गोट इंडिया टूर' इवेंट के दौरान हुई कथित अव्यवस्था के सिलसिले में थी।
इससे पहले, उन्होंने बिधाननगर पुलिस की तरफ से जारी कई समन को नजरअंदाज किया था, लेकिन आखिरकार कलकत्ता हाई कोर्ट से मिली अंतरिम कानूनी सुरक्षा के बाद वे पेश हुए।
यह मामला इवेंट के मुख्य आयोजक शताद्रु दत्ता की ओर से दर्ज कराई गई एफआईआर से जुड़ा है।
दत्ता ने आरोप लगाया था कि पिछले साल 13 दिसंबर को साल्ट लेक के युवा भारती क्रीड़ांगन में मेसी की मौजूदगी के दौरान हुई कथित अव्यवस्था और हंगामे में बिस्वास की अहम भूमिका थी।
एफआईआर के बाद, पुलिस ने पूछताछ के लिए बिस्वास को कई बार समन भेजा।
इसके बाद उन्होंने किसी भी सख्त कार्रवाई से सुरक्षा पाने के लिए कलकत्ता हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सिंगल बेंच ने शुरू में उन्हें 2 जुलाई तक अंतरिम सुरक्षा दी, जिससे वे गिरफ्तारी के जोखिम के बिना 18 जून को जांचकर्ताओं के सामने पेश हो सके।
बाद में दत्ता ने कलकत्ता हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच के सामने सुरक्षा आदेश को चुनौती दी।
हालांकि, डिवीजन बेंच ने पिछले आदेश में दखल देने से इनकार कर दिया और बिस्वास को मिली राहत को बरकरार रखा। इसके बाद सुरक्षा की अवधि 17 अगस्त तक बढ़ा दी गई, जिससे पूर्व मंत्री को सख्त कार्रवाई से सुरक्षित रहते हुए जांच में सहयोग जारी रखने की अनुमति मिल गई।
मेसी के दौरे के बाद युवा भारती स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में हुई कथित अव्यवस्था के बाद गिरफ्तार किए गए दत्ता ने बार-बार बिस्वास पर सुरक्षा लापरवाही और आयोजन की विफलताओं के लिए जिम्मेदार होने का आरोप लगाया है।
राज्य में सरकार बदलने के बाद, उन्होंने बिधाननगर पुलिस के पास एक नई शिकायत दर्ज कराई और उन आरोपों को दोहराया।
दत्ता के अनुसार, इवेंट के लिए लगभग 70,000 टिकट छापे गए ।
उन्होंने आरोप लगाया कि बिस्वास ने अपने आधिकारिक पद का इस्तेमाल करते हुए लगभग 22,000 टिकट लिए और बाद में उन्हें अपने सहयोगियों में बांट दिया या बेच दिया।
दत्ता ने इस हाई-प्रोफाइल फुटबॉल इवेंट के दौरान भीड़ के कुप्रबंधन और मची अफरातफरी के लिए पूर्व मंत्री को भी जिम्मेदार ठहराया है।





