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इस्लाम अमन का पैगाम देता है, जंग का नहीं : मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी

इस्लाम अमन का पैगाम देता है, जंग का नहीं : मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी
बरेली। फ़लस्तीन-इजराइल जंग के दो साल पूरे होने पर आल इंडिया मुस्लिम जमात की ओर से मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस की गई। जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रज़वी बरेलवी ने कहा कि इस्लाम अमन और शांति का पैगाम देता है, न कि जंग और हिंसा का। उन्होंने कहा कि हमास की 7 अक्टूबर 2023 की कार्रवाई ने न केवल इसराइल-फ़लस्तीन विवाद को और भड़काया, बल्कि वर्षों से जारी शांति प्रक्रिया को पूरी तरह पटरी से उतार दिया।

मौलाना रज़वी ने कहा कि ग़ाज़ा पर इजराइल की बमबारी से हज़ारों लोगों की जान जा चुकी है, पूरा शहर खंडहर बन गया है और इसका बड़ा कारण हमास का कट्टरपंथी रवैया है। अगर हमास ने निर्दोषों को बंधक न बनाया होता, तो आज यह हालात पैदा न होते। उन्होंने कहा कि इस्लाम में आतंकवाद, हिंसा और निर्दोषों की हत्या की कोई जगह नहीं है। क़ुरआन कहता है कि जिसने एक बेगुनाह को क़त्ल किया, उसने पूरी इंसानियत को क़त्ल किया।

उन्होंने कहा कि कट्टर संगठन इस्लाम की नहीं, बल्कि नफरत की राजनीति की नुमाइंदगी करते हैं। इस्लाम की सूफ़ी परम्परा मोहब्बत और भाईचारे की सीख देती है। मौलाना ने कहा कि फ़लस्तीन का हल हथियारों में नहीं, बल्कि शांति, संवाद और इंसाफ़ की राह में है। उन्होंने यासिर अराफ़ात की नीति का हवाला देते हुए कहा कि असली नेतृत्व वही होता है जो अपनी जनता को जंग से बचाए।

मौलाना ने कहा कि भारत और फ़लस्तीन के रिश्ते हमेशा मजबूत रहे हैं। भारत सरकार ने ग़ाज़ा के लिए राहत सामग्री भेजकर मानवता का परिचय दिया है और लगातार फ़लस्तीन की आर्थिक मदद करती रही है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौलाना मुजाहिद हुसैन, मुफ्ती फारूक़ रज़वी, मौलाना अनीसुर रहमान, तहसीन रज़ा खां, शाहिद रज़वी व फैसल इस्लाम मौजूद रहे।

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