नई दिल्ली। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इंडोनेशिया में भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) बेंगलुरु की स्थापना को लेकर पत्रकारों को जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आज भारत के शिक्षा जगत में स्वर्णिम अध्याय जोड़ा गया है।
वहीं पूरे एशिया उपमहाद्वीप में यह कैंपस पांचवीं सूची में शुमार है।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने बताया कि यह कदम भारतीय शिक्षा पद्धति का वैश्विकरण करने की दिशा में बहुत अहम माना जा रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत हमारा मुख्य मकसद भारत की शिक्षा पद्धति का अंतर्राष्ट्रीयकरण करना था।
इसी को देखते हुए अभी आईआईएम ने अपना कैंंपस दुबई में खोला है। आईआईटी दिल्ली ने अबू धाबी में अपना कैंपस खोला है और आईआईटी मद्रास ने ज़ांज़ीबार में अपना कैंपस खोला है। भारत की शिक्षा पद्धति का इंडोनेशिया में बड़े पैमाने पर स्वागत किया गया।
उन्होंने बताया कि भारत में 20 विदेशी विश्वविद्यालय विभिन्न राज्यों संचालित हो रहे हैं।
इससे यह साफ जाहिर होता है कि भारत की शिक्षा पद्धति को बड़े पैमाने पर वैश्विक मंच पर स्वीकार किया जा रहा है। मौजूदा समय में सही मायने में भारत शिक्षा का अंतरराष्ट्रीयकरण हो रहा है।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने बताया कि आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इंडोनेशिया का सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान ‘बिन्तांग अदिपुर्ना ऑफ द रिपब्लिक ऑफ इंडोनेशिया’ मिला है। इसके लिए मैं इंडोनेशिया की जनता को दिल से धन्यवाद देता हूं।
निश्चित तौर पर आज का दिन भारत के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है।
बहुत जल्द आईआईएम इंडोनेशिया में अपनी पढ़ाई शुरू कर देगी। बेंगलुर आईआईएम से पढ़े विद्यार्थी आज की तारीख में दुनियाभर में कई अहम पदों पर काबिज हैं। अब इससे न सिर्फ भारत के विद्यार्थी, बल्कि पूरी दुनियाभर के छात्र इससे जुड़ेंगे। इससे विद्यार्थियों को भारत के इकोसिस्टम से जुड़ने का मौका मिलेगा।





